रातोंरात दौलत

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अध्याय 763: बेहोशी का नाटक?

बाकी गुंडों के चेहरों पर भी वही गंदी लार टपकाती-सी हँसी थी।

उनमें से एक, जिसके चेहरे पर इतने दाने और गड्ढे थे कि वह चाँद की सतह जैसा दिखता था, उत्साह से हाथ मलते हुए अनुभवी अंदाज़ में बोला, “मेरे हिसाब से तो यह हसीना अभी तक कुँवारी है!”

“कुँवारी?”

यह एक शब्द सुनते ही सारे गुंडों की हवस भड़क उठी।

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